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MP News: मुख्यमंत्री की पहल पर हुई ओबीसी को 27 प्रतिशत आरक्षण देने सर्वदलीय बैठक, सर्वसम्मति से संकल्प पारित किया गया

Bhopal: मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि प्रदेश में अन्य पिछड़ा वर्ग को 27 प्रतिशत आरक्षण देने का विषय सर्वोच्च न्यायालय में विचाराधीन है। प्रदेश में सभी राजनीतिक दल अन्य पिछड़ा वर्ग को 27 प्रतिशत आरक्षण देने के लिए सहमत हैं। विभिन्न पक्षों के अधिवक्ता इस विषय में न्यायालय के सामने अपने-अपने बिन्दु रख रहे हैं। सर्वोच्च न्यायालय अन्य पिछड़ा वर्ग आरक्षण विषय पर 22 सितम्बर से प्रतिदिन सुनवाई करेगा। इस विषय पर सभी दलों की सहमति हो, इस संबंध में गुरूवार को मुख्यमंत्री निवास पर सर्वदलीय बैठक हुई।
बैठक में सर्वसम्मति से संकल्प पारित किया गया कि इस विषय में सभी दल एकजुट होकर एक फोरम पर आएंगे और विभिन्न पक्षों के अधिवक्तागण भी 10 सितम्बर तक एक साथ बैठक करेंगे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने अन्य पिछड़ा वर्ग के आरक्षण के संबंध में मुख्यमंत्री निवास स्थित समत्व भवन में हुई सर्वदलीय बैठक के बाद जारी अपने संदेश में यह बात कही।
बैठक में मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि सभी राजनीतिक दल एक मत से राज्य में अन्य पिछड़ा वर्ग के सदस्यों को 27 प्रतिशत आरक्षण प्रदान करने के लिए कटिबद्ध हैं। प्रदेश में अन्य पिछड़ा वर्ग के सदस्यों को राज्य शासन और उसके विभिन्न घटकों द्वारा की गई चयन प्रक्रिया में विभिन्न न्यायिक आदेशों के फलस्वरूप नियुक्ति आदेश जारी किए जाने से वंचित शेष 13 प्रतिशत अभ्यर्थियों को नियुक्ति पत्र जारी किए जाने सभी दल एकजुट होकर इसे क्रियान्वित करने के लिए विधायिका, न्यायपालिका और कार्यपालिका के सभी फोरम पर मिलकर प्रयास करेंगे।
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि राज्य सरकार ने अन्य पिछड़ा वर्ग को 27 प्रतिशत आरक्षण देने की अपनी प्रतिबद्धता के अनुसार हरसंभव प्रयास किए हैं। जिन विभागों में गुंजाइश थी उन सभी विभागों में आरक्षण देने में सरकार पीछे नहीं रही। कई विभाग जिनमें स्टे नहीं था, जैसे लोक निर्माण विभाग आदि में 27 प्रतिशत आरक्षण दिया गया। इस विषय में राज्य सरकार वरिष्ठतम अधिवक्ताओं की सलाह लेने और राज्य सरकार का पक्ष रखने में उनका सहयोग लेने के लिए वर्तमान में भी सहमत और तत्पर हैं। उन्होंने कहा कि अन्य पिछड़ा वर्ग को उनका हक दिलाने में प्रधानमंत्री मोदी की पहल पर हो रही जातिगत जनगणना से भी मदद मिलेगी।
मुख्यमंत्री डॉ. यादव द्वारा इस विषय पर सर्वदलीय बैठक आयोजित करने की पहल की राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों ने सराहना की। सर्वदलीय बैठक में शामिल सभी राजनैतिक दलों के प्रतिनिधियों और सदस्यों ने अन्य पिछड़ा वर्ग को 27 प्रतिशत आरक्षण दिए जाने के प्रस्ताव को सर्वसम्मति से पारित किया। बैठक में प्रदेश अध्यक्ष कांग्रेस जीतू पटवारी, नेता प्रतिपक्ष एवं विधायक उमंग सिंघार, पूर्व प्रदेश अध्यक्ष कांग्रेस अरूण यादव, प्रदेश अध्यक्ष बहुजन समाज पार्टी रमाकांत पिप्प्ल, प्रदेश अध्यक्ष समाजवाद पार्टी मनोज यादव, प्रदेश अध्यक्ष गोंडवाना गणतंत्र पार्टी एवं विधायक तलेश्वर सिंह मरकाम, प्रदेश अध्यक्ष आम आदमी पार्टी एवं महापौर नगर पालिक निगम सिंगरौली रानी अग्रवाल, भारतीय कम्यूनिस्ट पार्टी के जे.पी दुबे, पूर्व मंत्री कमलेश्वर पटेल तथा अधिवक्ता वरूण ठाकुर उपस्थित थे।
बैठक में पंचायत और ग्रामीण विकास मंत्री प्रहलाद पटेल, पिछड़ा वर्ग एवं अल्पसंख्यक कल्याण राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) कृष्णा गौर, अध्यक्ष पिछड़ा वर्ग कल्याण आयोग रामकृष्ण कुसमारिया, विधायक एवं प्रदेश अध्यक्ष भाजपा हेमंत खंडेलवाल, सतना सांसद गणेश सिंह तथा विधायक प्रदीप शामिल हुए। बैठक में एडवोकेट जनरल प्रशांत सिंह ने वर्चुअली सहभागिता की। मुख्य सचिव अनुराग जैन, प्रमुख सचिव विधि एन.पी. सिंह सहित वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।
कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी ने सर्वदलीय बैठक को स्वागत योग्य पहल बताया। समाजवाटी पार्टी के मनोज यादव ने कहा कि अन्य पिछड़ा वर्ग को उनका अधिकार मिलना चाहिए। पंचायत और ग्रामीण विकास मंत्री प्रहलाद पटेल, प्रदेश भाजपा अध्यक्ष हेमंत खंडलवाल तथा भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के जे.पी. दुबे ने भी अपने विचार रखे।
अन्य पिछड़ा वर्ग के लिए शिक्षा एवं सेवाओं में आरक्षण 27 प्रतिशत किए जाने संबंधी जानकारी
दिनांक 8 मार्च 2019 को म.प्र. शासन द्वारा अध्यादेश जारी कर अन्य पिछड़ा वर्ग के लिए शिक्षा एवं सेवाओं में आरक्षण 14 प्रतिशत से बढ़ाकर 27 प्रतिशत किया गया। दिनांक 14 अगस्त 2019 को विधानसभा में विधेयक पारित कर इसे कानून के रूप में लागू किया गया।
वर्तमान में 19 मार्च 2019 को दायर WP 5901/ 2019 (आशिता दुबे विरुद्ध मध्यप्रदेश शासन) सहित 40 से अधिक प्रकरण उच्चतर न्यायालयों में प्रचलन में हैं, जिनमें मूलतः अंतरिम आदेश द्वारा अध्यादेश/अधिनियम में 14 प्रतिशत से अधिक आरक्षण के क्रियान्वयन पर रोक लगाई गई है, परंतु अधिनियम की वैधानिकता पर न्यायालय द्वारा कोई प्रतिकूल टिप्पणी नहीं की गई है। अतः उपरोक्त अधिनियम आज की स्थिति में वैधानिक है एवं इसकी वैधानिकता पर वर्तमान में उच्चतम न्यायालय में याचिका क्रमांक Writ Petition (s) (Civil) No(s). 606/2025 में अंतिम सुनवाई 22 सितंबर 2025 से प्रारंभ होना नियत है।
दिनांक 19 मार्च 2019 को दायर याचिका WP 5901/2019 (आशिता दुबे विरुद्ध मध्यप्रदेश शासन) में अंतरिम आदेश द्वारा अध्यादेश के आधार पर 14 प्रतिशत से अधिक आरक्षण महाविद्यालय में प्रवेश के दौरान न देने के निर्देश दिये। (चिकित्सा शिक्षा विभाग) WP No.-25181/2019, WP No.-8923/2020 एवं 40 अन्य याचिकाओं में 27 प्रतिशत आरक्षण के साथ प्रकाशित विज्ञापनों (यथा MPPSC, PEB, TET आदि) पर रोक लगाई गई। उपरोक्त प्रकरणों में समय-समय पर पारित अंतरिम आदेश के कारण प्रावधानित 27 प्रतिशत अन्य पिछडा वर्ग आरक्षण का क्रियान्वयन प्रायोगिक रूप से संभव नहीं हो पाया है।
शासन द्वारा उच्च न्यायालय जबलपुर में प्रचलित WP No.-25181/2019, WP No.-8923/2020 एवं 40 अन्य याचिकाओं को WP 5901/2019 के साथ सम्मिलित कराया गया। उपरोक्त याचिकाओं में पारित अंतरिम आदेशों के मद्देनजर महाधिवक्ता के माध्यम से मध्यप्रदेश शासन द्वारा प्रभावी प्रतिरक्षण की कार्यवाही सुनिश्चित की गई।
दिनांक 29 सितंबर 2022 को सामान्य प्रशासन विभाग द्वारा मध्यप्रदेश लोक सेवा आयोग को परीक्षा परिणाम दो भागों में, 87 प्रतिशत पदों पर मुख्य तथा 13 प्रतिशत पदों पर प्रावधिक परिणाम घोषित करने के निर्देश जारी किये गए।
दिनांक 27 जनवरी 2024 को सामान्य प्रशासन विभागद्वारा मध्यप्रदेश कर्मचारी चयन बोर्ड को परीक्षा परिणाम दो भागों में, 87 प्रतिशत पदों पर मुख्य तथा 13 प्रतिशत पदों पर प्रावधिक परिणाम घोषित करने के निर्देश जारी किये गए।
50 प्रतिशत की उपरोक्त सीमा के संबंध में विद्यमान असाधारण परिस्थितियों (Extra ordinary circumstances) का विवरण/विश्लेषण का आधार अधिनियम में स्पष्ट नहीं है। अधिनियम के प्रभावी प्रतिरक्षण का सशक्त प्रयास मध्यप्रदेश शासन द्वारा महाधिवक्ता के माध्यम से किया जा रहा है।
दिनांक 02 सितंबर 2021 को मध्यप्रदेश पिछड़ा वर्ग कल्याण आयोग का गठन किया गया। मध्यप्रदेश पिछड़ा वर्ग कल्याण आयोग के उद्देश्य अनुसार – पिछड़े वर्गों की सामाजिक, शैक्षणिक एवं आर्थिक प्रस्थिति, इस वर्ग के पिछड़ेपन के कारणों के अध्ययन हेतु शासन आदेश दिनांक 06/10/2023 द्वारा दो सदस्यों की नियुक्ति की गई। अन्य असाधारण परिस्थितियों का चिन्हांकन भी उद्देश्यों में शामिल है।
दिनांक 05 मई 2022 को मध्यप्रदेश पिछड़ा वर्ग कल्याण आयोग द्वारा म.प्र. शासन को प्रथम प्रतिवेदन एवं दिनांक 12 मई 2022 को द्वितीय प्रतिवेदन प्रस्तुत किया गया।
सुरेश महाजन बनाम म.प्र. शासन WP 278/2022 केस में दिनांक 18 मई 2022 को उच्चतम न्यायालय द्वारा स्थानीय निर्वाचन (ग्रामीण एवं नगरीय निकाय), अन्य पिछड़ा वर्ग के आरक्षण (35 प्रतिशत तक) के साथ चुनाव करवाने हेतु अनुमति प्रदान की गई। अन्य पिछड़ा वर्ग के राजनैतिक प्रतिनिधित्व के लिए यह अभूतपूर्व कदम था।
विभिन्न राज्यों में अन्य पिछड़ा वर्ग आरक्षण और कुल आरक्षण की सापेक्ष स्थिति के दृष्टिगत भी राज्य सरकार अपना पक्ष रख रही है।
उच्च न्यायालय मध्यप्रदेश में अन्य पिछड़ा वर्ग के आरक्षण के संबंध में विचाराधीन समस्त याचिकाएँ उच्चतम न्यायालय नई दिल्ली, स्थानांतरित की गयी। वर्तमान में उच्चतम न्यायालय में याचिका क्रमांक Writ Petition(s) (Civil) No(s). – 606/2025 में अंतिम सुनवाई 22 सितंबर 2025 से प्रारंभ होना नियत है।
दिनांक 23 जुलाई 2025 को पिछड़ा वर्ग कल्याण आयोग के नए अध्यक्ष और सदस्य की नियुक्ति की गई है।
मध्यप्रदेश पिछडा वर्ग कल्याण आयोग ने शासन स्तर पर अन्य पिछड़ा वर्ग के सामाजिक, शैक्षणिक, आर्थिक एवं राजनैतिक आंकड़ों को एकत्रित करने के साथ साथ उनके पिछड़ेपन के कारणों का सर्वेक्षण तथा वैज्ञानिक अध्ययन करने के लिए डॉ. बी.आर. अम्बेडकर सामाजिक विज्ञान विश्वविद्यालय (महू) एवं म.प्र. जन अभियान परिषद (योजना, आर्थिक एवं सांख्यिकी विभाग) को कार्य सौंपा है। साथ ही उपलब्ध आंकड़ों के सामाजिक-वैज्ञानिक अनुसन्धान एवं सांख्यिकीय विश्लेषण हेतु विशेषज्ञ संस्थाओं की सेवायें भी ली जा रही हैं।
मध्यप्रदेश पिछड़ा वर्ग कल्याण आयोग द्वारा उपरोक्त बिन्दुओं पर अनुभवजन्य एवं विश्लेषणात्मक प्रतिवेदन तैयार करने की प्रक्रिया प्रचलन में है। प्रतिवेदन प्राप्त होने के उपरांत शासन द्वारा आगामी कार्यवाही की जाएगी।
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MP News: उज्जैन के बड़े गणेश मंदिर में 11 अगस्त को मनेगा स्वतंत्रता दिवस, तिथि के अनुसार होगा ध्वजारोहण

उज्जैन: देशभर में जहां स्वतंत्रता दिवस हर साल 15 अगस्त को मनाया जाता है, वहीं उज्जैन के प्राचीन बड़े गणेश मंदिर में इस बार आजादी का पर्व 11 अगस्त को मनाया जाएगा। मंदिर प्रबंधन का मानना है कि सनातन परंपरा के अन्य पर्वों की तरह स्वतंत्रता दिवस भी तिथि के अनुसार मनाया जाना चाहिए।
मंदिर प्रबंधन के अनुसार, 15 अगस्त 1947 को जब देश स्वतंत्र हुआ था, उस दिन श्रावण कृष्ण चतुर्दशी तिथि थी। वैदिक पंचांग के मुताबिक इस वर्ष यह तिथि 11 अगस्त को पड़ रही है। इसी वजह से मंदिर में इसी दिन स्वतंत्रता दिवस का आयोजन किया जाएगा।
तिरंगा यात्रा और ध्वजारोहण होगा
मंदिर में 11 अगस्त को सुबह तिरंगा यात्रा निकाली जाएगी। इसके बाद भगवान बड़े गणेश को तिरंगा अर्पित किया जाएगा और राष्ट्रीय ध्वज का पूजन होगा। महाआरती के बाद ‘वंदे मातरम्’ और देशभक्ति गीतों की प्रस्तुति होगी। कार्यक्रम के अंत में मंदिर के शिखर पर तिरंगा फहराया जाएगा।
पुजारी ने बताई वजह
मंदिर के पुजारी एवं ज्योतिषाचार्य पं. अक्षत व्यास ने कहा कि दीपावली, रक्षाबंधन, दशहरा और होली जैसे सभी पर्व हर वर्ष पंचांग की तिथि के अनुसार मनाए जाते हैं। ऐसे में स्वतंत्रता दिवस भी तिथि के आधार पर मनाया जाना चाहिए। उन्होंने बताया कि बड़े गणेश मंदिर में यह परंपरा कई वर्षों से निभाई जा रही है।
15 अगस्त 1947 के ध्वजारोहण का भी किया जिक्र
मंदिर की ओर से यह भी कहा गया कि 15 अगस्त 1947 को आधी रात स्वतंत्रता मिलने के समय तिरंगा फहराया गया था। उनके अनुसार, स्वतंत्रता के औपचारिक कार्यक्रम बाद में सुबह आयोजित किए गए।
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MPESB ने जारी किया संशोधित परीक्षा कैलेंडर: पुलिस कांस्टेबल, पटवारी समेत कई भर्तियां सितंबर से शुरू होंगी

भोपाल: मध्य प्रदेश कर्मचारी चयन मंडल (MPESB) ने वर्ष 2026 के लिए विभिन्न भर्ती और प्रवेश परीक्षाओं का संशोधित परीक्षा कैलेंडर जारी कर दिया है। नए कैलेंडर के अनुसार सितंबर से दिसंबर 2026 के बीच पुलिस कांस्टेबल, पटवारी, पंचायत सचिव, कृषि विस्तार अधिकारी, नायब तहसीलदार, सूबेदार, उप निरीक्षक, डिप्टी इंजीनियर और शिक्षक पात्रता परीक्षा समेत कई महत्वपूर्ण परीक्षाएं आयोजित की जाएंगी। मंडल ने स्पष्ट किया है कि यह संभावित परीक्षा कार्यक्रम है। प्रशासनिक आवश्यकता के अनुसार परीक्षा तिथियों में बदलाव किया जा सकता है।
पुलिस कांस्टेबल की सबसे बड़ी भर्ती
संशोधित कैलेंडर के मुताबिक पुलिस कांस्टेबल भर्ती परीक्षा अक्टूबर-नवंबर 2026 में प्रस्तावित है। इसके तहत 7,500 पदों पर भर्ती होगी। वहीं, 1,000 पुलिस कांस्टेबल (ड्राइवर) पदों के लिए परीक्षा नवंबर 2026 में आयोजित की जाएगी।
इन भर्तियों की भी तैयारी
सितंबर 2026 में 2,784 कृषि विस्तार अधिकारी और 2,299 पदों वाली ग्रुप-2 सब ग्रुप-4 संयुक्त भर्ती परीक्षा आयोजित होने की संभावना है। इसमें ब्लॉक पंचायत अधिकारी, पंचायत समन्वय अधिकारी, सहायक निरीक्षक समेत अन्य पद शामिल हैं।
डिप्टी इंजीनियर, मानचित्रकार, लैब टेक्नीशियन और अन्य समकक्ष 700 पदों की भर्ती परीक्षा सितंबर-अक्टूबर में प्रस्तावित है। वहीं, उप निरीक्षक संवर्ग भर्ती परीक्षा भी इसी अवधि में कराई जाएगी।
नवंबर-दिसंबर में पंचायत सचिव और नायब तहसीलदार भर्ती
नवंबर-दिसंबर 2026 में 2,900 पंचायत सचिव एवं रोजगार सहायक पदों के लिए परीक्षा होगी। इसी दौरान 73 नायब तहसीलदार पदों की विभागीय भर्ती परीक्षा भी आयोजित की जाएगी। इसके अलावा सूबेदार (मंत्रालयिक), स्टेनोग्राफर एवं सहायक उप निरीक्षक (मंत्रालयिक) के 566 पदों पर भर्ती परीक्षा अक्टूबर-नवंबर में होगी।
इन परीक्षाओं का भी कार्यक्रम जारी
- कार्यरत शिक्षकों के लिए प्राथमिक एवं माध्यमिक शिक्षक पात्रता परीक्षा – सितंबर/अक्टूबर 2026
- संस्कृति संचालनालय के अधीन शासकीय संगीत एवं ललित कला महाविद्यालयों के 33 पद- दिसंबर 2026
- ग्रुप-6 सब ग्रुप-1 भर्ती परीक्षा (700 पद)- दिसंबर 2026
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MP Patwari Strike: बिना प्रारंभिक जांच पटवारियों पर नहीं होगी FIR, सरकार ने कलेक्टरों को दिए निर्देश

भोपाल: मध्य प्रदेश में पटवारियों की अनिश्चितकालीन हड़ताल के बीच राज्य सरकार ने उनकी एक प्रमुख मांग मान ली है। अब किसी भी पटवारी के खिलाफ सीधे एफआईआर दर्ज नहीं की जाएगी। राजस्व विभाग के प्रमुख सचिव ने सभी कलेक्टरों को निर्देश दिए हैं कि एफआईआर दर्ज करने से पहले पूरे मामले की प्रारंभिक जांच कराई जाए। हालांकि सरकार के इस फैसले के बावजूद पटवारियों ने फिलहाल हड़ताल खत्म करने का ऐलान नहीं किया है। प्रदेश के करीब 23 हजार पटवारी अपनी विभिन्न मांगों को लेकर आंदोलन पर डटे हुए हैं।
बिना जांच FIR नहीं, पहले होगी पड़ताल
प्रमुख सचिव (राजस्व) ई. रमेश कुमार ने सभी कलेक्टरों को भेजे पत्र में कहा है कि किसी भी पटवारी के खिलाफ राजस्व न्यायालयों में प्रस्तुत प्रतिवेदन के आधार पर एफआईआर दर्ज करने से पहले पूरे मामले का प्रारंभिक परीक्षण किया जाए। जांच के बाद ही आगे की कार्रवाई की जाए।
पत्र में कहा गया है कि पटवारी कई मामलों में केवल प्रारंभिक प्रतिवेदन प्रस्तुत करते हैं और अंतिम निर्णय राजस्व न्यायालय गुण-दोष के आधार पर लेते हैं। इसके बावजूद कुछ मामलों में सीधे एफआईआर दर्ज होने की शिकायतें सामने आई थीं।
पटवारी संघ ने उठाई थी मांग
सोमवार को हड़ताली पटवारियों का प्रतिनिधिमंडल मंत्रालय में प्रमुख सचिव ई. रमेश कुमार से मिला था। प्रतिनिधिमंडल ने मांग की थी कि बिना जांच सीधे एफआईआर दर्ज न की जाए और पटवारियों को कानूनी संरक्षण दिया जाए। सरकार ने इस मांग को स्वीकार करते हुए सभी जिलों के कलेक्टरों को निर्देश जारी कर दिए हैं।
3 अगस्त से अनिश्चितकालीन हड़ताल
प्रदेश के पटवारी जुलाई से आंदोलन कर रहे हैं। पहले उन्होंने 15 से 17 जुलाई तक सामूहिक अवकाश लिया। इसके बाद सरकारी व्हाट्सएप ग्रुप से बाहर होने और त्वरित कार्यवाही से दूरी बनाने जैसे विरोध कार्यक्रम भी किए। मांगें पूरी नहीं होने पर 3 अगस्त से करीब 23 हजार पटवारी अनिश्चितकालीन हड़ताल पर चले गए। सरकार की ओर से एक मांग मान लिए जाने के बावजूद हड़ताल फिलहाल जारी है।
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Datia By Election Result: दतिया उपचुनाव में कांग्रेस की लगातार दूसरी जीत, घनश्याम सिंह ने भाजपा को 6,016 वोटों से हराया

भोपाल/दतिया: मध्य प्रदेश के दतिया विधानसभा उपचुनाव में कांग्रेस ने लगातार दूसरी बार भाजपा को मात दी है। कांग्रेस प्रत्याशी घनश्याम सिंह ने भाजपा के आशुतोष तिवारी को 6,016 वोटों से हराकर सीट अपने नाम की। घनश्याम सिंह को 66,757 वोट मिले, जबकि भाजपा उम्मीदवार आशुतोष तिवारी को 60,741 वोट हासिल हुए। दतिया सीट कांग्रेस विधायक राजेंद्र भारती को धोखाधड़ी के मामले में दो साल की सजा मिलने के बाद खाली हुई थी, जिसके चलते यहां उपचुनाव कराया गया।
पहले भाजपा आगे, फिर कांग्रेस ने बनाई बढ़त
मतगणना के शुरुआती राउंड में भाजपा बढ़त पर थी, लेकिन दूसरे राउंड के बाद कांग्रेस ने लगातार बढ़त बनाई और अंत तक उसे बरकरार रखा। 13वें और 14वें राउंड में भाजपा ने अंतर कम करने की कोशिश की, लेकिन कांग्रेस की बढ़त निर्णायक साबित हुई। दतिया कलेक्टर स्वप्निल वानखेड़े ने कांग्रेस प्रत्याशी घनश्याम सिंह को जीत का प्रमाण पत्र सौंपा।
नरोत्तम मिश्रा के बूथ पर भी भाजपा पीछे
पूर्व गृह मंत्री डॉ. नरोत्तम मिश्रा के पोलिंग बूथ नंबर-121 पर भी भाजपा को हार का सामना करना पड़ा। यहां कांग्रेस को 291 और भाजपा को 264 वोट मिले। उधर, हार के बाद भाजपा प्रत्याशी आशुतोष तिवारी ने भीतरघात का आरोप लगाते हुए कहा कि पार्टी को नुकसान पहुंचाने वालों को आत्ममंथन करना चाहिए।
CM मोहन यादव बोले- कांग्रेस की सीट कांग्रेस के पास रही
मुख्यमंत्री मोहन यादव ने परिणाम पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि दतिया पहले भी कांग्रेस की सीट थी और इस बार भी कांग्रेस के पास ही रही। उन्होंने दावा किया कि पिछले विधानसभा चुनाव की तुलना में भाजपा के वोट बढ़े हैं। पार्टी जल्द समीक्षा बैठक कर सकती है और भीतरघात के आरोपों की भी समीक्षा होगी।
ASP ने भी दिखाया दम
चुनाव में आजाद समाज पार्टी (कांशीराम) के उम्मीदवार दामोदर यादव ‘मंडल’ तीसरे स्थान पर रहे। उन्हें 22,527 वोट (14.30%) मिले। कुल 1,57,499 मतों में कांग्रेस और भाजपा को मिलाकर करीब 81% वोट मिले, जबकि ASP ने भी उल्लेखनीय प्रदर्शन कर मुकाबले को त्रिकोणीय बनाया।
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MP News: मध्य प्रदेश में 9 साल बाद होंगे छात्रसंघ चुनाव, हाईकोर्ट के निर्देश के बाद सितंबर में वोटिंग की तैयारी

भोपाल/ जबलपुर: मध्य प्रदेश के कॉलेजों और विश्वविद्यालयों में करीब नौ साल बाद छात्रसंघ चुनाव होने जा रहे हैं। हाईकोर्ट के निर्देश के बाद राज्य सरकार ने शैक्षणिक सत्र 2026-27 में सितंबर महीने में छात्रसंघ चुनाव कराने की जानकारी दी है। इसके साथ ही 2017 के बाद पहली बार छात्र प्रतिनिधियों का चुनाव होगा।
जबलपुर निवासी छात्र अदनान अंसारी की जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए एक्टिंग चीफ जस्टिस विवेक रूसिया और जस्टिस प्रदीप मित्तल की डिवीजन बेंच ने राज्य सरकार से चुनाव की स्थिति स्पष्ट करने को कहा था। सुनवाई के दौरान सरकार ने सितंबर में चुनाव कराने का आश्वासन दिया, जिसके बाद हाईकोर्ट ने याचिका का निराकरण कर दिया।
हाईकोर्ट ने सरकार से मांगी थी तय तारीख
इससे पहले हुई सुनवाई में हाईकोर्ट ने सरकार और उच्च शिक्षा विभाग के रवैये पर नाराजगी जताई थी। कोर्ट ने कहा था कि केवल आश्वासन और बहानों से काम नहीं चलेगा। सरकार को चुनाव की निश्चित तारीख और पूरी कार्ययोजना बतानी होगी। इसके बाद सरकार ने कोर्ट में शैक्षणिक कैलेंडर पेश करते हुए सितंबर में चुनाव कराने की जानकारी दी।
2017 के बाद नहीं हुए चुनाव
याचिकाकर्ता की ओर से कहा गया कि 2017 के बाद पहले कोरोना महामारी और फिर अन्य कारणों का हवाला देकर छात्रसंघ चुनाव नहीं कराए गए। इससे वर्षों से छात्रसंघों का गठन नहीं हो सका। याचिकाकर्ता अदनान अंसारी ने यह भी दावा किया कि छात्रसंघ चुनाव नहीं होने के बावजूद विश्वविद्यालय लगातार छात्रों से चुनाव शुल्क वसूलते रहे हैं। उन्होंने इस राशि का पूरा हिसाब भी कोर्ट के समक्ष पेश करने की मांग की है।
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