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महानदी विवाद सुलझाने की दिशा में बड़ी पहल: अमित शाह की अध्यक्षता में छत्तीसगढ़-ओडिशा के मुख्यमंत्रियों की बैठक

रायपुर/नई दिल्ली: छत्तीसगढ़ और ओडिशा के बीच लंबे समय से चले आ रहे महानदी जल विवाद के समाधान की दिशा में केंद्र सरकार ने एक और पहल की है। 1 अक्टूबर को नई दिल्ली के कर्तव्य भवन में केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह की अध्यक्षता में छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णु देव साय और ओडिशा के मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी की उच्चस्तरीय बैठक हुई। दोनों राज्यों ने महानदी से जुड़े मुद्दों पर अपना पक्ष रखा। बैठक में केंद्रीय जलशक्ति मंत्री सीआर पाटिल, केंद्रीय जल आयोग के अध्यक्ष और दोनों राज्यों के वरिष्ठ अधिकारी भी मौजूद रहे।
सीएम साय बोले- विवाद नहीं, सहयोग की धारा बने महानदी
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा कि महानदी केवल पानी का स्रोत नहीं, बल्कि दोनों राज्यों की कृषि, संस्कृति और जनजीवन से जुड़ी जीवनधारा है। इसे छत्तीसगढ़ और ओडिशा को बांटने वाली नहीं, बल्कि जोड़ने वाली नदी के रूप में देखा जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि समाधान टकराव के बजाय संवाद, सहयोग, विश्वास और आपसी सहमति से निकलना चाहिए। छत्तीसगढ़ न्यायपूर्ण, निष्पक्ष, वैज्ञानिक, पारदर्शी और दीर्घकालिक समाधान के लिए प्रतिबद्ध है।
किसानों और आने वाली पीढ़ियों के हित पर जोर
साय ने कहा कि किसी भी समाधान में दोनों राज्यों के किसानों, आम नागरिकों और आने वाली पीढ़ियों की जरूरतों को ध्यान में रखा जाना चाहिए। उन्होंने महानदी के जलग्रहण क्षेत्र, सिंचाई, पेयजल और ग्रामीण एवं आदिवासी क्षेत्रों की विकास संबंधी जरूरतों का उल्लेख करते हुए कहा कि इन वास्तविक आवश्यकताओं को समाधान में जगह मिलनी चाहिए। साथ ही उन्होंने ओडिशा की जरूरतों के प्रति सम्मान जताते हुए हीराकुंड जलाशय के महत्व का भी उल्लेख किया। उनके मुताबिक, दोनों राज्यों के हितों को साथ लेकर आगे बढ़ना ही स्थायी रास्ता है।
वैज्ञानिक आकलन के आधार पर फैसला
मुख्यमंत्री ने कहा कि महानदी विवाद में भावनाओं के साथ-साथ वैज्ञानिक तथ्यों और तकनीकी आकलन की भी अहम भूमिका है। जल उपलब्धता, वर्तमान और भविष्य की जरूरतों, सिंचाई, पेयजल, पर्यावरण तथा विकास संबंधी आवश्यकताओं का समग्र अध्ययन किया जाना चाहिए। उन्होंने केंद्रीय जल आयोग के तकनीकी आकलन और केंद्रीय जलशक्ति मंत्रालय की मध्यस्थता पर भरोसा जताया। साय के अनुसार, तकनीकी स्तर पर तथ्य स्पष्ट हों और राजनीतिक स्तर पर संवाद जारी रहे तो दोनों राज्यों को स्वीकार्य समाधान की दिशा में आगे बढ़ा जा सकता है।
जुलाई में भी हुई थी दोनों राज्यों के मुख्यमंत्रियों की बैठक
इससे पहले 30 जुलाई 2026 को केंद्रीय जलशक्ति मंत्री सीआर पाटिल की अध्यक्षता में भी छत्तीसगढ़ और ओडिशा के मुख्यमंत्रियों की बैठक हुई थी। केंद्र के मुताबिक, उस बैठक में संयुक्त तकनीकी समिति की प्रगति की समीक्षा की गई थी और दोनों राज्यों ने तकनीकी बातचीत जारी रखने की प्रतिबद्धता जताई थी। केंद्रीय जल आयोग के अध्यक्ष की अध्यक्षता में विस्तारित तकनीकी समिति का गठन भी किया गया है। इसकी पहली बैठक 29 जुलाई को हुई थी और शेष तकनीकी मुद्दों पर बातचीत आगे बढ़ाने की प्रक्रिया जारी है।
2018 में बना था महानदी जल विवाद न्यायाधिकरण
महानदी जल बंटवारे को लेकर छत्तीसगढ़ और ओडिशा के बीच विवाद के समाधान के लिए केंद्र सरकार ने 12 मार्च 2018 को महानदी जल विवाद न्यायाधिकरण का गठन किया था। विवाद के समानांतर केंद्र और दोनों राज्यों के स्तर पर तकनीकी एवं आपसी बातचीत भी जारी रही है। अब अमित शाह की अध्यक्षता में हुई बैठक को इसी प्रक्रिया में एक और उच्चस्तरीय पहल के रूप में देखा जा रहा है। फिलहाल किसी अंतिम जल-बंटवारे समझौते की घोषणा नहीं हुई है; बातचीत और तकनीकी विमर्श आगे जारी रहने की बात सामने आई है।
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Chhattisgarh: सहायक शिक्षक भर्ती में बड़ा बदलाव, दिव्यांग अभ्यर्थियों को भी मिलेगा आवेदन का मौका

रायपुर: छत्तीसगढ़ में सहायक शिक्षक भर्ती-2026 के विस्तृत विज्ञापन में संशोधन किया गया है। उच्च न्यायालय के आदेश के पालन में लोक शिक्षण संचालनालय ने शुद्धि पत्र जारी किया है। इसके तहत दृष्टिबाधित, श्रवणबाधित और सेरेब्रल पाल्सी श्रेणी के दिव्यांग अभ्यर्थियों को भी भर्ती के लिए ऑनलाइन आवेदन करने का अवसर मिलेगा।
भर्ती में ई-संवर्ग के 795 और टी-संवर्ग के 1,497 पद शामिल हैं। इस तरह कुल 2,292 पदों पर भर्ती प्रक्रिया जारी है। संबंधित दिव्यांग अभ्यर्थियों के लिए ऑनलाइन आवेदन की तारीख छत्तीसगढ़ कर्मचारी चयन मंडल अलग से घोषित करेगा।
हाईकोर्ट के आदेश के बाद संशोधन
लोक शिक्षण संचालनालय के अनुसार, सहायक शिक्षक भर्ती का विस्तृत विज्ञापन 24 जुलाई 2026 को जारी किया गया था। विज्ञापन में संशोधन छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट में दायर याचिका क्रमांक WPS 6783/2026 (मीनाक्षी मंगलकर एवं अन्य बनाम छत्तीसगढ़ शासन एवं अन्य) में 9 अक्टूबर 2026 को पारित निर्णय के पालन में किया गया है।
तीन श्रेणियों को किया गया शामिल
समाज कल्याण विभाग की 11 सितंबर 2026 की संशोधित अधिसूचना के अनुरूप सहायक शिक्षक पद के लिए उपयुक्त दिव्यांगता श्रेणियों में दृष्टिबाधित (Blind), श्रवणबाधित (Deaf) और सेरेब्रल पाल्सी (Cerebral Palsy) को शामिल किया गया है। विस्तृत विज्ञापन की कंडिका 5 के उपखंड (iv) को भी विलोपित किया गया है।
शुद्धि पत्र में दिव्यांग अभ्यर्थियों के लिए आरक्षित पदों का समूहवार और श्रेणीवार विवरण भी स्पष्ट किया गया है। इसमें दृष्टिबाधित, श्रवणबाधित, अस्थिबाधित और बहुदिव्यांगता से संबंधित समूह शामिल हैं।
ई-संवर्ग में 795, टी-संवर्ग में 1,497 पद
भर्ती के संशोधित विवरण के अनुसार, ई-संवर्ग में 795 और टी-संवर्ग में 1,497 पद हैं। ई-संवर्ग में रायपुर, दुर्ग, महासमुंद, बलौदाबाजार-भाटापारा, बालोद, बेमेतरा, राजनांदगांव, कबीरधाम, जांजगीर-चांपा, मुंगेली, रायगढ़ और बिलासपुर जिले शामिल हैं। वहीं, टी-संवर्ग में बस्तर, बीजापुर, दंतेवाड़ा, कोंडागांव, कांकेर, नारायणपुर, सुकमा, सरगुजा, सूरजपुर, बलरामपुर-रामानुजगंज, कोरिया, जशपुर, कोरबा, रायगढ़, गरियाबंद और बालोद जिले शामिल हैं।
आवेदन की तारीख अलग से होगी जारी
लोक शिक्षण संचालनालय ने स्पष्ट किया है कि दृष्टिबाधित, श्रवणबाधित और सेरेब्रल पाल्सी श्रेणी के अभ्यर्थियों के ऑनलाइन आवेदन की तारीख कर्मचारी चयन मंडल अलग से जारी करेगा। 24 जुलाई को जारी मूल विज्ञापन की बाकी शर्तें और प्रावधान पहले की तरह लागू रहेंगे।
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छत्तीसगढ़ कैबिनेट: पूर्व अग्निवीरों के लिए आरक्षक के 36 पदों पर भर्ती को मंजूरी, आदिम जाति विकास विभाग का नाम बदला

रायपुर: छत्तीसगढ़ सरकार ने पूर्व अग्निवीरों को पुलिस भर्ती में अवसर देने की दिशा में एक और कदम उठाया है। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की अध्यक्षता में रविवार को मुख्यमंत्री निवास कार्यालय में हुई कैबिनेट बैठक में गृह विभाग के अंतर्गत आरक्षक के 36 पदों पर पूर्व अग्निवीरों की भर्ती को मंजूरी दी गई। इन पदों पर रिक्तियों के अनुसार भर्ती की जाएगी। राज्य सरकार पहले ही पूर्व अग्निवीरों को आरक्षक भर्ती में श्रेणीवार 10 प्रतिशत आरक्षण देने का प्रावधान कर चुकी है।
आदिम जाति विकास विभाग का नाम बदलेगा
कैबिनेट ने आदिम जाति विकास विभाग का नाम बदलकर जनजातीय कार्य विभाग करने के प्रस्ताव को भी मंजूरी दी। इसके लिए छत्तीसगढ़ शासन के कार्य आवंटन नियमों में संशोधन किया जाएगा। बैठक में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सरकार के मुखिया के रूप में 25 साल पूरे होने पर अभिनंदन प्रस्ताव भी पारित किया गया। बैठक के बाद मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने मीडिया से बातचीत में प्रधानमंत्री के कार्यकाल और केंद्र सरकार की विभिन्न उपलब्धियों का उल्लेख किया।
सीएम साय बोले- नक्सलवाद का खात्मा छत्तीसगढ़ के लिए बड़ी उपलब्धि
मुख्यमंत्री साय ने कहा कि नरेंद्र मोदी के प्रधानमंत्री बनने के बाद छत्तीसगढ़ को सबसे बड़ा फायदा नक्सलवाद के खिलाफ अभियान के रूप में हुआ है। उन्होंने कहा कि नक्सलवाद लंबे समय तक प्रदेश के विकास में बड़ी बाधा बना रहा। बस्तर के लोगों को विकास की मुख्यधारा से जोड़ने को लेकर भी चिंता बनी रहती थी। साय के मुताबिक, केंद्र सरकार के नेतृत्व में नक्सलवाद के खिलाफ लगातार कार्रवाई हुई है और छत्तीसगढ़ अब इससे मुक्ति की दिशा में आगे बढ़ रहा है। उन्होंने इसे प्रदेश के विकास के लिए महत्वपूर्ण उपलब्धि बताया।
गुजरात मॉडल और अर्थव्यवस्था का भी किया जिक्र
मुख्यमंत्री ने कहा कि नरेंद्र मोदी ने गुजरात के मुख्यमंत्री के रूप में करीब 13 साल तक काम किया। इस दौरान गुजरात में विकास का एक मॉडल तैयार हुआ, जिसे गुजरात मॉडल के नाम से पहचान मिली। उन्होंने कच्छ में आए भीषण भूकंप के बाद पुनर्निर्माण और वाइब्रेंट गुजरात जैसे आयोजनों का भी उल्लेख किया। साय ने कहा कि 2014 में प्रधानमंत्री बनने के बाद नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत ने आर्थिक क्षेत्र में प्रगति की है। उन्होंने भारत के दुनिया की प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में आगे बढ़ने का श्रेय प्रधानमंत्री की मेहनत और दूरदृष्टि को दिया।
2047 तक विकसित भारत का लक्ष्य
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का लक्ष्य 2047 तक भारत को विकसित देश बनाना और अर्थव्यवस्था के मामले में दुनिया में तीसरे स्थान पर पहुंचाना है। उन्होंने कहा कि देश इसी दिशा में आगे बढ़ रहा है। साय ने राष्ट्रीय सुरक्षा का जिक्र करते हुए एयर स्ट्राइक, सर्जिकल स्ट्राइक और ऑपरेशन सिंदूर जैसी सैन्य कार्रवाइयों का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि भारत किसी को उकसाता नहीं है, लेकिन किसी भी चुनौती का जवाब देने में सक्षम है।
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नवा रायपुर में बैडमिंटन अकादमी शुरू करेंगे पुलेला गोपीचंद, CM बोले- बेहतर प्रशिक्षण और आधुनिक सुविधाएं मिलेंगी

नवा रायपुर: छत्तीसगढ़ में खेल प्रतिभाओं को विश्वस्तरीय प्रशिक्षण और आधुनिक सुविधाएं उपलब्ध कराने की दिशा में नवा रायपुर में बैडमिंटन अकादमी शुरू की जाएगी। पद्म भूषण सम्मानित बैडमिंटन खिलाड़ी और प्रशिक्षक पुलेला गोपीचंद इस अकादमी की शुरुआत करेंगे। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कहा कि राज्य सरकार का लक्ष्य प्रदेश के खिलाड़ियों को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं के लिए तैयार करना है।
मुख्यमंत्री ने नवा रायपुर में प्रस्तावित विश्वस्तरीय स्पोर्ट्स क्लब की पहल का स्वागत करते हुए कहा कि इससे प्रदेश में खेल संस्कृति को बढ़ावा मिलेगा। युवाओं को बेहतर प्रशिक्षण और आधुनिक सुविधाएं मिलेंगी। उन्होंने क्लब के संस्थापकों और टीम को शुभकामनाएं दीं।
खेल सुविधाओं के लिए बजट में ₹100 करोड़
मुख्यमंत्री साय ने कहा कि राज्य सरकार ने इस वर्ष खेलों के समग्र विकास के लिए बजट में 100 करोड़ रुपए का प्रावधान किया है। केंद्र सरकार की खेलो इंडिया जैसी योजनाओं के समन्वय से प्रदेश में आधुनिक खेल अधोसंरचना विकसित की जा रही है। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ में प्रतिभाओं की कमी नहीं है। जरूरत उन्हें पहचानने, तराशने और बेहतर अवसर देने की है। सरकार चाहती है कि शहरों के साथ दूरस्थ वनांचलों के प्रतिभाशाली खिलाड़ियों को भी संसाधनों के अभाव में पीछे न रहना पड़े।
मुख्यमंत्री ने कहा, खेल केवल पदक जीतने का माध्यम नहीं हैं। इनसे अनुशासन, आत्मविश्वास, टीम भावना और नेतृत्व क्षमता भी विकसित होती है। खेलों में निवेश युवाओं और प्रदेश के भविष्य में निवेश है।
गोपीचंद बोले- खेल और स्वास्थ्य को मिले प्राथमिकता
पुलेला गोपीचंद ने छत्तीसगढ़ में स्वागत के लिए मुख्यमंत्री और राज्य सरकार का आभार जताया। उन्होंने नवा रायपुर के विकास की सराहना करते हुए कहा कि इलेशियम क्लब्स की पहल खेल, स्वास्थ्य और सक्रिय जीवनशैली को बढ़ावा देने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। गोपीचंद ने कहा कि पिछले 10-12 वर्षों में देश में खेलों के प्रति दृष्टिकोण में बदलाव आया है। अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में भारतीय खिलाड़ियों की जीत और तिरंगे का ऊंचा होना पूरे देश का आत्मविश्वास बढ़ाता है। उन्होंने बच्चों की शिक्षा के साथ शारीरिक विकास पर भी समान ध्यान देने की जरूरत बताई। बच्चों को दौड़ने, कूदने, चढ़ने और अलग-अलग खेल गतिविधियों में भाग लेने के पर्याप्त अवसर मिलने चाहिए।
2047 तक विकसित भारत के लिए स्वस्थ युवा जरूरी
गोपीचंद ने कहा कि खेलों में निवेश सिर्फ खिलाड़ी तैयार करने तक सीमित नहीं है, बल्कि इससे स्वस्थ, अनुशासित और आत्मविश्वासी समाज का निर्माण भी होता है। उन्होंने खेल सुविधाओं, उत्कृष्टता और निवेश को प्रोत्साहित करने के लिए छत्तीसगढ़ सरकार के प्रयासों की सराहना की। उनके मुताबिक, वर्ष 2047 तक विकसित भारत का लक्ष्य हासिल करने के लिए ऐसी युवा पीढ़ी जरूरी है, जो शिक्षित होने के साथ स्वस्थ, सक्रिय और शारीरिक रूप से सक्षम भी हो।
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छत्तीसगढ़ में 18 IPS अधिकारियों के तबादले, पुलिस मुख्यालय से लेकर जिलों तक बदली जिम्मेदारी

रायपुर: छत्तीसगढ़ सरकार ने शुक्रवार को पुलिस विभाग में बड़ा फेरबदल करते हुए 18 IPS अधिकारियों के तबादले और नई पदस्थापना के आदेश जारी किए हैं। गृह (पुलिस) विभाग की ओर से जारी आदेश में 2021 से 2024 बैच तक के अधिकारियों को नई जिम्मेदारियां सौंपी गई हैं। इनमें पुलिस मुख्यालय में पदस्थापना के साथ विभिन्न जिलों में अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक (ASP), नगर पुलिस अधीक्षक (CSP) और सहायक पुलिस महानिरीक्षक (AIG) के पद शामिल हैं। सभी तबादले तत्काल प्रभाव से लागू होंगे।
पुलिस मुख्यालय में इन अधिकारियों को जिम्मेदारी
- झा अमनकुमार रमनकुमार: बीजापुर में ASP (ऑप्स) से पुलिस मुख्यालय, नवा रायपुर में पुलिस अधीक्षक (SIA)।
- अजय कुमार: नारायणपुर में ASP (ऑप्स) से पुलिस अधीक्षक (SIB), पुलिस मुख्यालय।
- आकाश श्रीमाल: कांकेर जिले के भानुप्रतापपुर में ASP (ऑप्स) से पुलिस मुख्यालय में सहायक पुलिस महानिरीक्षक की जिम्मेदारी।
- अक्षय प्रमोद सबद्रा: ASP (ऑप्स), नारायणपुर से सहायक पुलिस महानिरीक्षक (योजना/प्रबंध)।
- आकाश कुमार शुक्ला: एसटीएफ बघेरा, दुर्ग से पुलिस मुख्यालय में सहायक पुलिस महानिरीक्षक (ANTF)।
- रविन्द्र कुमार मीणा: बीजापुर में ASP (ऑप्स) से पुलिस अधीक्षक (चिटफंड एवं महिला विरुद्ध अपराध)।
- रोहित कुमार शाह: सुकमा में ASP (ऑप्स) से 15वीं वाहिनी छत्तीसगढ़ सशस्त्र बल, बीजापुर के सेनानी।
इन पदस्थापनाओं के जरिए पुलिस मुख्यालय और विशेष इकाइयों में अधिकारियों की जिम्मेदारियों में बदलाव किया गया है।
कई जिलों में ASP (ऑप्स) की नई पोस्टिंग
जिलों में भी अधिकारियों की जिम्मेदारियां बदली गई हैं। नई पदस्थापनाएं इस प्रकार हैं:
- सुमीतकुमार दत्ताहारी ASP (ऑप्स)- कांकेर
- ईशु अग्रवाल ASP (ऑप्स)- नारायणपुर
- मयंक मिश्रा ASP (ऑप्स)- सुकमा
- वैशाली जैन ASP (ऑप्स)- जगदलपुर
- विमल कुमार पाठक ASP (ऑप्स)- नारायणपुर
- हर्षित मेहर ASP (ऑप्स)- कोंडागांव
- राहुल बंसल ASP (ऑप्स)- बीजापुर
इनमें सुमीतकुमार दत्ताहारी पहले जगदलपुर में नगर पुलिस अधीक्षक थे। ईशु अग्रवाल रायपुर में सहायक पुलिस आयुक्त के पद पर तैनात थे। मयंक मिश्रा रायगढ़, वैशाली जैन राजनांदगांव, विमल कुमार पाठक कोरबा, हर्षित मेहर दुर्ग और राहुल बंसल अंबिकापुर में पदस्थ थे।
प्रशिक्षु अधिकारियों को भी मिली नई जिम्मेदारी
तबादला आदेश में प्रशिक्षु अधिकारियों को भी नई पदस्थापना दी गई है।
- अंशिका जैन: नगर पुलिस अधीक्षक, जगदलपुर।
- साकोर मानसी नानाभाउ: सहायक पुलिस आयुक्त, आजाद चौक, रायपुर नगरीय।
- आदित्य कुमार: नगर पुलिस अधीक्षक, राजनांदगांव।
- प्रतीक बंसोडे: नगर पुलिस अधीक्षक, अंबिकापुर।
ये अधिकारी 2022 से 2024 बैच तक के हैं। नई पदस्थापनाओं के साथ उन्हें शहरी पुलिसिंग और जिलों में जिम्मेदारी संभालने का अवसर दिया गया है।
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Chhattisgarh: सूरजपुर मां-बेटी हत्याकांड में 3 को फांसी, एक को उम्रकैद, प्रधान आरक्षक की पत्नी और 11 साल की बेटी की हत्या का मामला

सूरजपुर: छत्तीसगढ़ के सूरजपुर जिले की फास्ट ट्रैक कोर्ट ने प्रधान आरक्षक की पत्नी और उनकी 11 वर्षीय बेटी की हत्या के मामले में गुरुवार को बड़ा फैसला सुनाया। जिला एवं अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश आनंद प्रकाश वारियाल की अदालत ने चारों दोषियों को सजा सुनाई। मुख्य आरोपी कुलदीप साहू समेत तीन दोषियों को मौत की सजा और चौथे आरोपी को उम्रकैद दी गई। मौत की सजा पाने वालों में कुलदीप साहू (32), चंद्रकांत चौधरी (28) और फूल सिंह उर्फ रिंकू (28) शामिल हैं। वहीं आर्यन विश्वकर्मा उर्फ गोल्डी (20) को मरते दम तक उम्रकैद की सजा सुनाई गई है।
13 अक्टूबर 2024 को हुई थी मां-बेटी की हत्या
मामला 13 अक्टूबर 2024 का है। पुलिस के मुताबिक, सूरजपुर शहर में प्रधान आरक्षक की 35 वर्षीय पत्नी और उनकी 11 वर्षीय बेटी की हत्या कर दी गई थी। अभियोजन पक्ष के अनुसार, महिला के साथ पहले रेप किया गया और इसके बाद मां-बेटी की हत्या कर शवों को पिढ़ा गांव के पास फेंक दिया गया था। करीब दो साल चली सुनवाई के बाद अदालत ने 29 सितंबर 2026 को चारों आरोपियों को दोषी ठहराया था। गुरुवार को अदालत ने सजा का ऐलान किया।
मां-बेटी के शरीर पर मिले थे 61 चोट के निशान
पोस्टमॉर्टम में महिला के शरीर पर 33 और बच्ची के शरीर पर 28 चोट के निशान मिले थे। अभियोजन पक्ष ने इन साक्ष्यों को मामले की गंभीरता के तौर पर अदालत के सामने रखा। अभियोजन के मुताबिक, जांच के दौरान आरोपियों के कपड़ों पर खून के निशान और अन्य साक्ष्य भी सामने आए थे। अदालत ने उपलब्ध साक्ष्यों और गवाहों के आधार पर चारों को दोषी माना।
पुलिसकर्मी पर गर्म तेल फेंकने से शुरू हुआ घटनाक्रम
पुलिस के अनुसार, वारदात वाली रात कुलदीप साहू ने दुर्गा प्रतिमा विसर्जन जुलूस के रास्ते में तैनात आरक्षक घनश्याम सोनी पर गर्म तेल फेंका था। पुलिस ने उसकी तलाश शुरू की। पुलिस का दावा है कि उसे पकड़ने की कोशिश के दौरान साहू ने पुलिसकर्मियों को कार से कुचलने का प्रयास किया और वहां से भाग निकला। इसके बाद वह प्रधान आरक्षक के घर पहुंचा, जहां उसकी पत्नी और बेटी पर हमला किया गया।
शव घर से करीब 4 किलोमीटर दूर मिले
पुलिस के अनुसार, हत्या के बाद दोनों के शवों को घर से करीब चार किलोमीटर दूर पिढ़ा गांव के पास ले जाकर फेंक दिया गया था। मामले में कुलदीप साहू के साथ चंद्रकांत चौधरी, फूल सिंह और आर्यन विश्वकर्मा को आरोपी बनाया गया था।
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