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Chhattisgarh Assembly: राज्य के इतिहास का अब तक का सबसे बड़ा ₹35,000 करोड़ का अनुपूरक बजट पेश, वित्तमंत्री बोले- सरकार वादों पर नहीं, परिणामों पर विश्वास करती है

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Chhattisgarh Assembly: Presents supplementary budget of ₹35,000 crore, the largest ever in the state's history; Finance Minister says government believes in results, not promises

Raipur: छत्तीसगढ़ सरकार ने राज्य के इतिहास का अब तक का सबसे बड़ा ₹35,000 करोड़ का अनुपूरक बजट प्रस्तुत कर विकास, वित्तीय अनुशासन और दूरदर्शी शासन की स्पष्ट प्रतिबद्धता प्रदर्शित की है। वित्त मंत्री ओ.पी. चौधरी ने कहा कि यह अनुपूरक बजट केवल संसाधनों की व्यवस्था नहीं, बल्कि निरंतर आर्थिक प्रगति और संतुलित विकास की मजबूत दिशा है।

वित्त मंत्री ने कहा कि पिछली सरकार द्वारा विभिन्न बोर्डों और निगमों पर छोड़े गए ₹45,000 करोड़ से अधिक के लंबित ऋण ने इन संस्थानों को लगभग निष्क्रिय स्थिति में पहुँचा दिया था। इस अनुपूरक बजट के माध्यम से सरकार ने मार्कफेड और नान (NAAN) जैसे महत्वपूर्ण संस्थानों को संबल प्रदान करने का गंभीर प्रयास किया है, जो राज्य में धान खरीदी और सार्वजनिक वितरण प्रणाली की रीढ़ हैं। इन संस्थाओं को सुदृढ़ किए बिना किसानों का कल्याण और नागरिकों की खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित नहीं की जा सकती।

उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री साय के नेतृत्व में सरकार ने औद्योगिक विकास को भी समान प्राथमिकता दी है। राज्य में औद्योगिक गतिविधियों को गति देने तथा विभिन्न औद्योगिक विकास एवं प्रोत्साहन योजनाओं को निरंतरता प्रदान करने के लिए अनुपूरक बजट में ₹360 करोड़ का प्रावधान किया गया है, जिससे निवेश, रोजगार और उत्पादन क्षमता को बढ़ावा मिलेगा।

वित्त मंत्री ने कहा कि राज्य के समग्र और संतुलित विकास के लिए केवल राजस्व व्यय पर्याप्त नहीं होता, बल्कि दूरदर्शी पूंजीगत व्यय ही भविष्य की समृद्ध अर्थव्यवस्था और मजबूत अधोसंरचना का आधार बनता है। सड़क, पुल, सिंचाई, बिजली, शिक्षा, स्वास्थ्य और डिजिटल कनेक्टिविटी जैसे क्षेत्रों में किया गया निवेश आने वाले दशकों तक विकास के स्थायी स्रोत तैयार करता है। इसी सोच के साथ सरकार ने पूंजीगत व्यय को अपनी विकास रणनीति का केंद्र बनाया है।

उन्होंने बताया कि छत्तीसगढ़ राज्य के गठन के बाद बीते 25 वर्षों में पूंजीगत व्यय में लगभग 55 गुना की ऐतिहासिक वृद्धि दर्ज हुई है। वित्तीय वर्ष 2022-23 में जहाँ पूंजीगत व्यय ₹13,320 करोड़ था, वहीं 2023-24 में यह बढ़कर ₹15,419 करोड़ और 2024-25 में ₹20,055 करोड़ तक पहुँचा। मुख्य बजट 2025-26 में पूंजीगत व्यय के लिए ₹26,341 करोड़ का प्रावधान किया गया है, साथ ही अनुपूरक बजट में अतिरिक्त ₹2,000 करोड़ का प्रावधान किया गया है।

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वित्त मंत्री ने कहा कि बजट के कुल आकार के अनुपात में भी पूंजीगत व्यय में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। जहाँ पूर्व सरकार के समय यह लगभग 3.5 प्रतिशत था, वहीं वर्ष 2025-26 में इसके 4.1 प्रतिशत तक पहुँचने की संभावना है। यह स्पष्ट रूप से दर्शाता है कि सरकार दीर्घकालिक विकास और मजबूत अधोसंरचना निर्माण को सर्वोच्च प्राथमिकता दे रही है।

अपने वक्तव्य के समापन में वित्त मंत्री ओ.पी. चौधरी ने कहा कि यह सरकार वादों पर नहीं, बल्कि परिणामों पर विश्वास करती है। पूंजीगत व्यय के माध्यम से संकल्पों को कागज से जमीन तक उतारने का कार्य किया जा रहा है। सरकार का स्पष्ट लक्ष्य छत्तीसगढ़ को आर्थिक रूप से सशक्त, अधोसंरचना के दृष्टिकोण से मजबूत और देश के अग्रणी राज्यों की श्रेणी में स्थापित करना है।

अनुपूरक बजट में सड़क एवं भवन निर्माण क्षेत्र को भी विशेष प्राथमिकता दी गई है। अधोसंरचना से जुड़े निर्माण कार्यों को समयबद्ध रूप से पूर्ण करने के उद्देश्य से अतिरिक्त वित्तीय प्रावधान किए गए हैं। इसके अंतर्गत ग्रामीण क्षेत्रों में कनेक्टिविटी सुदृढ़ करने के लिए ग्रामीण सड़क कार्यक्रम (आरआरपी फेज-2) हेतु ₹175 करोड़ का प्रावधान किया गया है। वहीं राज्य में प्रमुख सड़कों के उन्नयन एवं विस्तार के लिए छत्तीसगढ़ राज्य सड़क क्षेत्र परियोजना (एडीबी लोन-3) के अंतर्गत ₹150 करोड़ का अतिरिक्त प्रावधान किया गया है। इसके साथ ही चिरमिरी-नागपुर हॉल्ट रेल लाइन परियोजना के लिए ₹86 करोड़ की राशि का प्रावधान कर क्षेत्रीय परिवहन नेटवर्क को और अधिक सुदृढ़ करने की दिशा में ठोस कदम उठाया गया है।

अनुपूरक बजट में कृषि विकास एवं किसान कल्याण को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए व्यापक वित्तीय प्रावधान किए गए हैं। किसानों की आय बढ़ाने और कृषि को आधुनिक एवं लाभकारी बनाने के उद्देश्य से कृषि उन्नति योजना के लिए अनुपूरक बजट में ₹2,000 करोड़ का प्रावधान किया गया है। इसके साथ ही किसानों को 5 एचपी तक के पंपों के लिए मुफ्त बिजली उपलब्ध कराने हेतु ₹1,700 करोड़ की राशि का प्रावधान किया गया है, जिससे सिंचाई लागत में कमी आएगी और कृषि उत्पादन को स्थायी बल मिलेगा। किसानों को बिना ब्याज के ऋण सुविधा उपलब्ध कराने के लिए अनुपूरक में ₹187 करोड़ का प्रावधान कर उन्हें वित्तीय संबल प्रदान किया गया है।

इसके अतिरिक्त, फसल जोखिम से सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के अंतर्गत ₹122 करोड़ का प्रावधान किया गया है, वहीं कृषि क्षेत्र में जल प्रबंधन एवं सिंचाई क्षमता बढ़ाने के लिए प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना हेतु ₹35 करोड़ का प्रावधान किया गया है। कृषि नवाचार और अनुसंधान को बढ़ावा देने की दिशा में बायोटेक इन्क्यूबेशन सेंटर के भवन निर्माण के लिए ₹4 करोड़ का प्रावधान कर राज्य में कृषि आधारित नवाचार एवं तकनीकी विकास को नई गति देने का प्रयास किया गया है।

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अनुपूरक बजट में खाद्य सुरक्षा एवं पोषण व्यवस्था को सुदृढ़ करने पर विशेष जोर दिया गया है। पिछली सरकार द्वारा छोड़े गए लंबित भुगतानों के निपटान हेतु अनुपूरक बजट में कुल ₹19,224 करोड़ का प्रावधान किया गया है, जिससे सार्वजनिक वितरण प्रणाली और खाद्य सुरक्षा तंत्र को स्थायित्व प्रदान किया जा सके। इसके अंतर्गत मुख्यमंत्री खाद्यान्न सहायता योजना के तहत ₹6,800 करोड़ का प्रावधान किया गया है, ताकि पात्र हितग्राहियों को नियमित, निर्बाध और गुणवत्तापूर्ण खाद्यान्न उपलब्ध कराया जा सके।

इसके साथ ही राज्य में धान खरीदी की महत्वपूर्ण व्यवस्था को मजबूती देने के उद्देश्य से मार्कफेड को धान खरीदी में हुई हानि के निपटान हेतु ₹12,424 करोड़ का प्रावधान किया गया है। इस प्रावधान से न केवल किसानों को समय पर भुगतान सुनिश्चित होगा, बल्कि राज्य की सार्वजनिक वितरण प्रणाली और खाद्य सुरक्षा ढांचे को भी दीर्घकालिक स्थिरता मिलेगी, जिससे आम नागरिकों के पोषण एवं खाद्य अधिकारों की प्रभावी रक्षा सुनिश्चित की जा सकेगी।

अनुपूरक बजट में सड़क सुरक्षा एवं पर्यावरण संरक्षण को सुदृढ़ करने के लिए महत्वपूर्ण वित्तीय प्रावधान किए गए हैं। आपातकालीन सेवाओं की त्वरित उपलब्धता सुनिश्चित करने के उद्देश्य से राज्य के सभी जिला एवं ब्लॉक मुख्यालयों तक फायर वाहन एवं आधुनिक अग्निशमन यंत्रों की व्यवस्था हेतु अनुपूरक बजट में ₹154 करोड़ का प्रावधान किया गया है, जिससे आपदा एवं अग्नि दुर्घटनाओं की स्थिति में त्वरित और प्रभावी कार्रवाई संभव हो सकेगी।

सड़क दुर्घटनाओं में कमी लाने और यातायात अनुशासन को सुदृढ़ करने के लिए ऑटोमैटिक नंबर प्लेट रिकॉग्निशन (ANPR) कैमरा प्रणाली के लिए ₹75 करोड़ का प्रावधान किया गया है। इसके साथ ही परिवहन व्यवस्था को अधिक पारदर्शी और तकनीक-सक्षम बनाने के उद्देश्य से राज्य के समस्त परिवहन कार्यालयों में ऑटोमेटेड ड्राइविंग टेस्ट ट्रैक के निर्माण हेतु अनुपूरक में ₹12 करोड़ का प्रावधान किया गया है।

पर्यावरण संरक्षण और स्वच्छ परिवहन को बढ़ावा देने की दिशा में इलेक्ट्रिक वाहनों के उपयोग को प्रोत्साहित करने हेतु अनुपूरक बजट में ₹35 करोड़ की सब्सिडी का प्रावधान किया गया है। इन पहलों के माध्यम से सरकार न केवल सड़क सुरक्षा को मजबूत कर रही है, बल्कि प्रदूषण नियंत्रण और हरित परिवहन की दिशा में भी ठोस कदम उठा रही है।

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अनुपूरक बजट में औद्योगिक विकास को नई गति देने के उद्देश्य से कुल ₹360 करोड़ का प्रावधान किया गया है। इसके अंतर्गत राज्य में नए औद्योगिक क्षेत्रों की स्थापना के लिए ₹180 करोड़ का प्रावधान किया गया है, जिससे निवेश के लिए अनुकूल अधोसंरचना विकसित होगी और उद्योगों को सुस्पष्ट स्थान एवं सुविधाएं उपलब्ध कराई जा सकेंगी।

अनुपूरक बजट में औद्योगिक विकास को नई गति देने के उद्देश्य से कुल ₹360 करोड़ का प्रावधान किया गया है। इसके अंतर्गत राज्य में नए औद्योगिक क्षेत्रों की स्थापना के लिए ₹180 करोड़ का प्रावधान किया गया है, जिससे निवेश के लिए अनुकूल अधोसंरचना विकसित होगी और उद्योगों को सुस्पष्ट स्थान एवं सुविधाएं उपलब्ध कराई जा सकेंगी। इसके साथ ही औद्योगिक इकाइयों को प्रोत्साहित करने हेतु लागत पूंजी अनुदान के रूप में ₹130 करोड़ का प्रावधान किया गया है, जिससे नए उद्यमों की स्थापना और मौजूदा इकाइयों के विस्तार को बल मिलेगा।

इसके अतिरिक्त उद्योगों की वित्तीय लागत को कम करने और उन्हें प्रतिस्पर्धी बनाने के उद्देश्य से ब्याज अनुदान के रूप में ₹25 करोड़ का प्रावधान किया गया है। इन प्रावधानों के माध्यम से राज्य सरकार निवेश, रोजगार सृजन और औद्योगिक उत्पादन को बढ़ावा देने की अपनी प्रतिबद्धता को स्पष्ट रूप से दर्शा रही है, जिससे छत्तीसगढ़ में संतुलित और सतत औद्योगिक विकास को मजबूती मिलेगी।

अनुपूरक बजट में महिला एवं बाल विकास को सशक्त बनाने के लिए ठोस वित्तीय प्रावधान किए गए हैं। महिलाओं की आर्थिक सुरक्षा, सम्मान और आत्मनिर्भरता सुनिश्चित करने के उद्देश्य से महतारी वंदन योजना के लिए अनुपूरक बजट में ₹2,500 करोड़ का प्रावधान किया गया है। इस योजना के माध्यम से राज्य की महिलाओं को नियमित आर्थिक सहायता प्रदान कर उनके जीवन स्तर को सुदृढ़ करने और पारिवारिक निर्णयों में उनकी भूमिका को और अधिक मजबूत करने का प्रयास किया जा रहा है।

इसके साथ ही मातृ एवं शिशु पोषण, प्रारंभिक बाल देखभाल और आंगनबाड़ी सेवाओं की गुणवत्ता में सुधार के लिए सक्षम आंगनबाड़ी एवं पोषण 2.0 योजना के अंतर्गत अनुपूरक में ₹225 करोड़ का प्रावधान किया गया है। इन प्रावधानों से पोषण स्तर में सुधार, स्वास्थ्य संकेतकों को सुदृढ़ करने और भावी पीढ़ी के समग्र विकास को सुनिश्चित करने की दिशा में सरकार की प्रतिबद्धता स्पष्ट होती है।

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ग्रामीण क्षेत्रों के समग्र विकास और आवासीय सुरक्षा को सुदृढ़ करने के लिए सरकार द्वारा बजट में महत्वपूर्ण प्रावधान किए गए हैं। केवल ग्रामीण क्षेत्रों में आवास उपलब्ध कराने के उद्देश्य से मुख्य बजट में ₹8,500 करोड़ का प्रावधान किया गया है, वहीं अनुपूरक बजट के माध्यम से इसके लिए ₹1,000 करोड़ का अतिरिक्त प्रावधान किया जा रहा है, जिससे ग्रामीण परिवारों को सुरक्षित और सम्मानजनक आवास सुनिश्चित किया जा सके।

इसके साथ ही ग्रामीण अधोसंरचना और बुनियादी सेवाओं को मजबूत करने के लिए प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के अंतर्गत ₹378 करोड़ का प्रावधान किया गया है, जिससे गांवों की सड़क कनेक्टिविटी को और अधिक सुदृढ़ किया जाएगा। स्वच्छता और स्वास्थ्य को बढ़ावा देने के लिए स्वच्छ भारत मिशन हेतु ₹150 करोड़ का प्रावधान किया गया है। ग्राम पंचायतों की प्रशासनिक एवं संस्थागत क्षमता को मजबूत करने के उद्देश्य से राष्ट्रीय ग्राम स्वराज अभियान के लिए ₹40 करोड़ तथा ग्रामीण महिलाओं और स्व-सहायता समूहों के आजीविका सशक्तिकरण हेतु राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के अंतर्गत ₹286 करोड़ का प्रावधान किया गया है।

हवाई कनेक्टिविटी से लेकर किसान कल्याण और बस्तर में शांति तक: साय सरकार की बहुआयामी विकास रणनीति

मुख्यमंत्री साय के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ सरकार राज्य के समावेशी विकास और संतुलित क्षेत्रीय प्रगति के लिए निरंतर कार्य कर रही है। इसी क्रम में हवाई कनेक्टिविटी को सुदृढ़ करने के उद्देश्य से अनुपूरक बजट में बिलासपुर एयरपोर्ट के विकास के लिए ₹150 करोड़ तथा रायगढ़ एयरपोर्ट के विकास के लिए ₹30 करोड़ का प्रावधान किया गया है। इन निवेशों से क्षेत्रीय संपर्क, औद्योगिक गतिविधियों और नागरिक सुविधाओं को नई गति मिलेगी।

मुख्यमंत्री साय की सरकार ने किसान कल्याण को सर्वोच्च प्राथमिकता दी है। सरकार की संवेदनशील और किसान-हितैषी नीतियों का प्रत्यक्ष प्रमाण यह है कि बीते दो वर्षों में ₹25,000 करोड़ से अधिक की राशि सीधे किसानों तक पहुँची है। यह न केवल किसानों की आय और आर्थिक सुरक्षा को सुदृढ़ करता है, बल्कि राज्य की कृषि आधारित अर्थव्यवस्था को भी मजबूत आधार प्रदान करता है।

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राज्य में शांति और सुरक्षा की दिशा में भी साय सरकार निर्णायक परिणाम लेकर आई है। 31 मार्च 2026 की समयसीमा के निकट आते हुए सरकार इस बात को लेकर आश्वस्त और प्रतिबद्ध है कि छत्तीसगढ़ जल्द ही वामपंथी उग्रवाद (एलडब्ल्यूई) की समस्या से पूर्णतः मुक्त होगा। शांति, संवाद, विकास और सुरक्षा की बहुआयामी रणनीति के माध्यम से साय सरकार ने ऐसे वातावरण का निर्माण किया है, जिसमें नक्सल प्रभावित क्षेत्रों के लोग लोकतंत्र की मुख्यधारा से जुड़ रहे हैं और विकास की यात्रा में सहभागी बन रहे हैं।

बस्तर, जहाँ कभी गोलियों की आवाजें गूंजती थीं, आज वहाँ बस्तर पंडुम जैसे सांस्कृतिक आयोजन और बस्तर ओलंपिक जैसे खेल महोत्सव नई पहचान बना रहे हैं। यह परिवर्तन केवल सुरक्षा अभियानों का परिणाम नहीं, बल्कि साय सरकार की उस बहुआयामी विकास नीति का प्रमाण है, जिसने विश्वास, उत्सव और भविष्य की आशा को बस्तर की धरती पर पुनः स्थापित किया है।

“₹35,000 करोड़ का यह ऐतिहासिक अनुपूरक बजट छत्तीसगढ़ के भविष्य को मजबूत आधार देने वाला बजट है, जिसमें विकास, वित्तीय अनुशासन और संवेदनशील शासन की स्पष्ट झलक दिखाई देती है। यह बजट किसानों, महिलाओं, गरीबों, युवाओं और उद्योगों के लिए समान रूप से अवसर सृजित करता है। पूंजीगत व्यय को प्राथमिकता देकर सरकार ने सड़कों, आवास, कृषि, उद्योग, कनेक्टिविटी और सामाजिक सुरक्षा के माध्यम से राज्य की अर्थव्यवस्था को दीर्घकालिक रूप से सशक्त बनाने का संकल्प लिया है। बस्तर में शांति, किसानों को सीधा आर्थिक लाभ, महिलाओं का सम्मान और ग्रामीण क्षेत्रों का समग्र विकास—ये सभी इस बात के प्रमाण हैं कि सरकार वादों नहीं, परिणामों की राजनीति कर रही है और छत्तीसगढ़ को देश के अग्रणी विकसित राज्यों की श्रेणी में स्थापित करने की दिशा में पूरी प्रतिबद्धता के साथ आगे बढ़ रही है।”- मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय

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Chhattisgarh: किसानों को खाद-बीज की कमी नहीं होने देंगे- CM साय, सुपेबेड़ा पेयजल योजना के लिए 7 करोड़ मंजूर

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Raipur: मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि प्रदेश में किसानों को खाद और बीज की उपलब्धता में किसी प्रकार की कमी नहीं होनी चाहिए। छोटे और सीमांत किसानों को प्राथमिकता के आधार पर उर्वरक उपलब्ध कराया जाए तथा इसकी जवाबदेही संबंधित जिलों के कलेक्टरों की होगी।

मुख्यमंत्री शनिवार को गरियाबंद जिला पंचायत कार्यालय में आयोजित रायपुर संभाग स्तरीय समीक्षा बैठक में अधिकारियों को संबोधित कर रहे थे। करीब साढ़े तीन घंटे चली इस मैराथन बैठक में रायपुर, गरियाबंद, धमतरी, महासमुंद और बलौदाबाजार जिलों की विकास योजनाओं, कानून-व्यवस्था और जनकल्याणकारी कार्यक्रमों की समीक्षा की गई।

सुपेबेड़ा की पेयजल समस्या के समाधान के लिए 7 करोड़ मंजूर

बैठक में मुख्यमंत्री ने गरियाबंद जिले के सुपेबेड़ा क्षेत्र की लंबे समय से चली आ रही पेयजल समस्या के स्थायी समाधान के लिए बड़ा फैसला लिया। उन्होंने तेल नदी पर एनीकट निर्माण हेतु 7 करोड़ रुपए की स्वीकृति प्रदान की। मुख्यमंत्री ने कहा कि पेयजल जैसी मूलभूत सुविधाओं का स्थायी समाधान सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल है।

नैनो यूरिया और नैनो डीएपी को बढ़ावा

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मुख्यमंत्री ने कृषि अधिकारियों को निर्देश दिए कि वे गांव-गांव जाकर किसानों को नैनो यूरिया और नैनो डीएपी के उपयोग और उसके लाभों की जानकारी दें। उन्होंने कहा कि आधुनिक कृषि तकनीकों के उपयोग से उत्पादन बढ़ाने और लागत कम करने में मदद मिलेगी।

अवैध रेत उत्खनन पर सख्ती

मुख्यमंत्री ने समीक्षा बैठक में अवैध रेत उत्खनन और परिवहन पर कड़ी कार्रवाई करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि प्राकृतिक संसाधनों के अवैध दोहन को किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

योजनाओं का लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंचे

मुख्यमंत्री ने कहा कि शासन की योजनाओं का लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंचना चाहिए। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि आम नागरिकों को योजनाओं का लाभ लेने में किसी प्रकार की परेशानी नहीं होनी चाहिए और शिकायतों का त्वरित समाधान सुनिश्चित किया जाए।

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इन योजनाओं की हुई समीक्षा

बैठक में प्रधानमंत्री आवास योजना, प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना, प्रधानमंत्री सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना, आयुष्मान भारत योजना, जल जीवन मिशन, बिहान, तेंदूपत्ता संग्रहण, महतारी वंदन योजना, सामाजिक सुरक्षा पेंशन, प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि तथा धान उपार्जन एवं उठाव की प्रगति की समीक्षा की गई।

मुख्यमंत्री ने आयुष्मान कार्ड के शत-प्रतिशत कवरेज, टीबी मुक्त पंचायतों के निर्माण, जल जीवन मिशन के समयबद्ध क्रियान्वयन और पीएम किसान सम्मान निधि के पात्र हितग्राहियों तक लाभ पहुंचाने के निर्देश दिए।

AI तकनीक से बेहतर होगी पढ़ाई

शिक्षा विभाग की समीक्षा के दौरान मुख्यमंत्री ने कहा कि जिन स्कूलों में विषय विशेषज्ञ शिक्षकों की कमी है, वहां कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) आधारित तकनीकों का उपयोग कर पढ़ाई की गुणवत्ता बेहतर बनाई जाए। उन्होंने स्कूलों में सीखने के स्तर को सुधारने, नियमित मॉनिटरिंग और नवाचार आधारित शिक्षण पद्धतियों को बढ़ावा देने पर भी जोर दिया।

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नए आपराधिक कानूनों और सड़क सुरक्षा पर फोकस

मुख्यमंत्री ने कानून-व्यवस्था, सड़क सुरक्षा और देश में लागू तीन नए आपराधिक कानूनों की समीक्षा करते हुए अधिकारियों को प्रशिक्षण कार्यक्रम और जनजागरूकता अभियान चलाने के निर्देश दिए। साथ ही नशा मुक्ति अभियान को प्रभावी बनाने पर भी बल दिया। उन्होंने कहा कि सुशासन तिहार केवल शिकायत निवारण का अभियान नहीं, बल्कि शासन और जनता के बीच सीधा संवाद स्थापित करने का माध्यम है।

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Sushasan Tihar 2026: आम और बरगद की छांव में मुख्यमंत्री की चौपाल, खाट पर बैठकर सुनी ग्रामीणों की समस्याएं, नर्सिंग कॉलेज से लेकर बैंक शाखा तक की घोषणाएं

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Sushasan Tihar 2026: सुशासन तिहार 2026 के तहत मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने शनिवार को गौरेला-पेंड्रा-मरवाही जिले के ग्राम निमधा और सक्ती जिले के ग्राम ठठारी में ग्रामीणों के बीच पहुंचकर जनचौपाल लगाई। आम और बरगद के पेड़ों की छांव में ग्रामीणों के बीच बैठकर मुख्यमंत्री ने उनकी समस्याएं सुनीं, योजनाओं की जमीनी हकीकत जानी और कई महत्वपूर्ण विकास कार्यों की घोषणाएं कीं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि सुशासन तिहार का उद्देश्य केवल योजनाओं की समीक्षा करना नहीं, बल्कि यह सुनिश्चित करना है कि शासन की योजनाओं का लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंचे।

निमधा में खाट पर बैठकर किया जनसंवाद

मरवाही विकासखंड के ग्राम निमधा में मुख्यमंत्री आम के पेड़ की छांव में खाट पर बैठकर ग्रामीणों से रूबरू हुए। उन्होंने बिजली, पानी, राशन, सड़क, स्वास्थ्य, शिक्षा और आवास जैसी मूलभूत सुविधाओं को लेकर लोगों से सीधे फीडबैक लिया।

जनचौपाल के दौरान ग्रामीणों और मरवाही विधायक प्रणव कुमार मरपच्ची ने जिले में नर्सिंग कॉलेज, ग्राम निमधा में मिनी स्टेडियम और सर्वसमाज के लिए विशाल मंगल भवन की मांग रखी। मुख्यमंत्री ने तीनों मांगों को तत्काल स्वीकृति देते हुए घोषणा की।

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राजस्व अधिकारियों को दी सख्त चेतावनी

राजस्व विभाग से जुड़ी शिकायतें सामने आने पर मुख्यमंत्री ने संबंधित अधिकारियों को कड़ी चेतावनी देते हुए कहा कि जनता की समस्याओं के समाधान में लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने स्पष्ट कहा कि समय पर निराकरण नहीं करने वाले अधिकारियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई होगी।

महिलाओं को दिया ‘करोड़पति दीदी’ बनने का मंत्र

मुख्यमंत्री ने स्व-सहायता समूहों की महिलाओं और लखपति दीदियों से संवाद करते हुए कहा कि अब लक्ष्य केवल लखपति बनना नहीं, बल्कि करोड़पति दीदी बनना होना चाहिए।

महिलाओं ने बताया कि महतारी वंदन योजना की राशि बच्चों की पढ़ाई और घरेलू जरूरतों में सहयोग कर रही है। मुख्यमंत्री ने बताया कि हाल ही में योजना की 28वीं किस्त के तहत प्रदेश की लगभग 70 लाख महिलाओं के खातों में राशि अंतरित की गई है।

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‘आजीविका गाथा’ पुस्तक का विमोचन

राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन ‘बिहान’ से जुड़ी महिलाओं ने मुख्यमंत्री का स्वागत किया। इस दौरान मुख्यमंत्री ने महिला स्व-सहायता समूहों की सफलता की कहानियों पर आधारित ‘आजीविका गाथा’ कॉफी टेबल बुक का विमोचन किया। उन्होंने कहा कि यह पुस्तक महिलाओं के संघर्ष, आत्मनिर्भरता और सफलता की प्रेरक यात्रा का दस्तावेज है।

स्थानीय व्यंजनों का लिया स्वाद

ग्रामीण परिवेश में आयोजित चौपाल के दौरान मुख्यमंत्री ने सरई के दोना-पत्तल में परोसे गए जामुन, कोईलार भाजी, बेल का शरबत, आम की चटनी और आमपना का स्वाद भी लिया।

बरगद की छांव में सजी ठठारी की चौपाल

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इसके बाद मुख्यमंत्री सक्ती जिले के ग्राम ठठारी पहुंचे, जहां चतुर्भुज तालाब पार स्थित विशाल बरगद के पेड़ की छांव में जनचौपाल लगाई गई। मुख्यमंत्री ने ग्रामीणों के बीच बैठकर उनकी समस्याएं सुनीं और योजनाओं के क्रियान्वयन की स्थिति का आकलन किया। उन्होंने ग्रामीणों से महतारी वंदन योजना, प्रधानमंत्री आवास योजना, बिजली, पानी और अन्य मूलभूत सुविधाओं की जानकारी ली।

सीएम हेल्पलाइन जल्द होगी शुरू

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश में जल्द ही अत्याधुनिक सीएम हेल्पलाइन शुरू की जाएगी। नागरिक टोल फ्री नंबर, ईमेल और व्हाट्सएप के माध्यम से शिकायत दर्ज करा सकेंगे। शिकायतों के समयबद्ध समाधान की व्यवस्था होगी और लापरवाही करने वाले अधिकारियों पर कार्रवाई की जाएगी।

ठठारी को मिली कई सौगातें

ग्रामीणों की मांग पर मुख्यमंत्री ने चतुर्भुज विष्णु मंदिर के निकट श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए आरती घाट निर्माण की घोषणा की। साथ ही ठठारी में बैंक शाखा खोलने और क्षेत्र में सड़क निर्माण कार्य स्वीकृत करने का ऐलान किया।

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मुख्यमंत्री ने कलेक्टर को ठठारी को नगर पंचायत बनाने का प्रस्ताव तैयार कर शासन को भेजने के निर्देश भी दिए। उन्होंने कहा कि आने वाले समय में ठठारी को नगर पंचायत का दर्जा दिया जाएगा।

विकास और सुशासन पर जोर

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश में शिक्षा, स्वास्थ्य, सड़क और आधारभूत संरचना के क्षेत्र में तेजी से विकास कार्य किए जा रहे हैं। बस्तर में भी शांति और विकास का नया वातावरण स्थापित हुआ है। उन्होंने कहा कि सुशासन का वास्तविक अर्थ शासन और जनता के बीच विश्वास, संवाद और सहभागिता को मजबूत करना है। जब जनप्रतिनिधि और अधिकारी सीधे जनता के बीच पहुंचते हैं, तभी योजनाओं का लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंचना सुनिश्चित होता है।

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Bilaspur: सीएंम साय ने बिलासपुर को दी 134 करोड़ की सौगात, महतारी वंदन की 28वीं किस्त जारी, वृद्धाश्रम और दिव्यांग केंद्र का किया शिलान्यास

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Bilaspur: मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने सुशासन तिहार के तहत बिलासपुर के हेमूनगर में आयोजित जिला स्तरीय समाधान शिविर में 134 करोड़ रुपये से अधिक लागत के विकास कार्यों का लोकार्पण और शिलान्यास किया। इस दौरान मुख्यमंत्री ने महतारी वंदन योजना की 28वीं किस्त जारी की और कई महत्वपूर्ण विकास घोषणाएं भी कीं। मुख्यमंत्री ने कहा कि सुशासन, विकास और जनकल्याण राज्य सरकार की पहचान है। सरकार का उद्देश्य केवल योजनाएं बनाना नहीं, बल्कि उनका लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाना है।

80 दिव्यांगों को मिली मोटराइज्ड ट्राईसाइकिल

कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने 80 दिव्यांगजनों को मोटराइज्ड ट्राईसाइकिल वितरित की। साथ ही प्रधानमंत्री आवास योजना के हितग्राहियों को प्रतीकात्मक रूप से आवास की चाबियां सौंपीं। उन्होंने कहा कि सरकार का लक्ष्य लोगों को आत्मनिर्भर और सम्मानजनक जीवन उपलब्ध कराना है।

22.65 करोड़ से बनेगा 200 सीटर वृद्धाश्रम

मुख्यमंत्री ने एसईसीएल के CSR फंड से 22 करोड़ 65 लाख रुपये की लागत से बनने वाले 200 सीटर बहुउद्देशीय वृद्धाश्रम भवन का शिलान्यास किया। यहां वरिष्ठ नागरिकों को प्राकृतिक चिकित्सा, योग, फिजियोथेरेपी और पुनर्वास जैसी आधुनिक सुविधाएं मिलेंगी।

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दिव्यांगों के लिए बनेगा 500 सीटर पुनर्वास केंद्र

सीएम साय ने 18 करोड़ 76 लाख रुपये की लागत से बनने वाले 500 सीटर दिव्यांगजन शिक्षण-प्रशिक्षण एवं बहुउद्देशीय पुनर्वास केंद्र की आधारशिला भी रखी। इस केंद्र में शिक्षा, कौशल विकास, स्पीच थेरेपी, ऑडिटरी ट्रेनिंग और फिजियोथेरेपी जैसी सुविधाएं उपलब्ध होंगी।

जिला अस्पताल को मिली अत्याधुनिक CT स्कैन मशीन

मुख्यमंत्री ने जिला अस्पताल में 4 करोड़ 50 लाख रुपये की लागत से स्थापित अत्याधुनिक CT स्कैन मशीन का लोकार्पण किया। इससे गंभीर बीमारियों की जांच स्थानीय स्तर पर ही संभव हो सकेगी।

मुख्यमंत्री हेल्पलाइन जल्द होगी शुरू

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मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार ई-डिस्ट्रिक्ट के तहत 400 से अधिक सरकारी सेवाएं ऑनलाइन उपलब्ध करा चुकी है। वहीं आम लोगों की शिकायतों के समयबद्ध निराकरण के लिए मुख्यमंत्री हेल्पलाइन सेवा भी जल्द शुरू की जाएगी।

बस्तर में नक्सलवाद के खिलाफ निर्णायक सफलता

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन, सुरक्षा बलों की कार्रवाई और बस्तर की जनता के सहयोग से नक्सलवाद के खिलाफ निर्णायक सफलता मिल रही है। बस्तर में सड़क, बिजली, स्वास्थ्य, शिक्षा और पेयजल जैसी सुविधाओं का तेजी से विस्तार हो रहा है।

बेलतरा कॉलेज का नाम होगा सखाराम सूर्यवंशी के नाम पर

कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने बेलतरा महाविद्यालय का नामकरण स्वर्गीय सखाराम सूर्यवंशी के नाम पर करने की घोषणा की। इसके अलावा बेलतरा विधानसभा क्षेत्र में पांच मंगल भवनों के निर्माण की भी घोषणा की गई। मुख्यमंत्री ने कहा कि बिलासपुर के सर्वांगीण विकास के लिए राज्य सरकार विशेष कार्ययोजना पर काम कर रही है और जिले की सभी महत्वपूर्ण परियोजनाओं को प्राथमिकता के साथ पूरा किया जाएगा।

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NHAI Green Highway: फ्लाई-ऐश से बन रहीं ग्रीन हाईवे, छत्तीसगढ़ में 3 साल में सड़क निर्माण में खपी 3 करोड़ टन से ज्यादा राख

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Raipur: राष्ट्रीय राजमार्गों के निर्माण में अब केवल कंक्रीट और डामर ही नहीं, बल्कि औद्योगिक कचरा भी उपयोगी साबित हो रहा है। भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) पर्यावरण संरक्षण और सस्टेनेबल डेवलपमेंट को बढ़ावा देने के लिए फ्लाई-ऐश, स्टील स्लैग, पुराने टायरों के रबर और बायो-बिटुमेन जैसी पुनर्चक्रित सामग्रियों का उपयोग कर ग्रीन हाईवे विकसित कर रहा है।

छत्तीसगढ़ में इस दिशा में उल्लेखनीय काम हुआ है। एनएचएआई के मुताबिक वर्ष 2024-25 में 2.17 करोड़ मीट्रिक टन और वर्ष 2025-26 में 62 लाख मीट्रिक टन से अधिक फ्लाई-ऐश सड़क निर्माण में उपयोग की गई। वहीं चालू वित्तीय वर्ष 2026-27 में अब तक करीब 20 लाख मीट्रिक टन फ्लाई-ऐश का उपयोग किया जा चुका है।

स्टील स्लैग और पुराने टायर भी बन रहे सड़क का हिस्सा

सड़क निर्माण में औद्योगिक कचरे की रिसाइक्लिंग को बढ़ावा देते हुए स्टील उद्योग के अपशिष्ट (स्लैग), अनुपयोगी टायरों के रबर और बायो-बिटुमेन का भी इस्तेमाल किया जा रहा है। वर्ष 2024-25 में 30,477 मीट्रिक टन और वर्ष 2025-26 में 2,691 मीट्रिक टन वैकल्पिक सामग्रियों का उपयोग कर पर्यावरण-अनुकूल राजमार्ग तैयार किए गए।

जल संरक्षण पर भी विशेष फोकस

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एनएचएआई सड़क निर्माण के साथ जल संरक्षण को भी प्राथमिकता दे रहा है। राष्ट्रीय राजमार्गों के किनारे देशभर में 13 अमृत सरोवरों का निर्माण और जीर्णोद्धार किया गया है। वर्षा जल संचयन को बढ़ावा देने के लिए वाटर हार्वेस्टिंग पिट्स की संख्या एक वर्ष में 14 से बढ़ाकर 105 कर दी गई।

निर्माण कार्यों और पौधों की सिंचाई में पीने योग्य पानी की जगह सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट (STP) से प्राप्त 323 किलोलीटर शोधित जल का उपयोग किया गया है।

सीतानदी-उदंती में बन रही 3 किमी लंबी सुरंग

वन्यजीवों और पर्यावरण संरक्षण को ध्यान में रखते हुए छत्तीसगढ़ के सीतानदी-उदंती अभयारण्य क्षेत्र में लगभग 3 किलोमीटर लंबी आधुनिक सुरंग विकसित की जा रही है। इससे वाहनों का आवागमन भूमिगत होगा और जंगल के प्राकृतिक वातावरण पर कम प्रभाव पड़ेगा।

परियोजना में साउंड बैरियर्स, मंकी कैनोपी, एलिफेंट पास और एनिमल अंडरपास जैसी सुविधाएं भी विकसित की जा रही हैं, ताकि वन्यजीवों की आवाजाही प्रभावित न हो।

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हाईवे किनारे बनेंगे बी-कॉरिडोर और मेडिसीन पार्क

एनएचएआई अब हाईवे को केवल परिवहन मार्ग नहीं, बल्कि एक जीवंत पारिस्थितिकी तंत्र के रूप में विकसित करने की दिशा में काम कर रहा है। इसके तहत सड़क किनारे बी-कॉरिडोर विकसित किए जाएंगे, जिससे प्राकृतिक परागण बढ़ेगा और किसानों को फायदा मिलेगा।

इसके अलावा खाली जमीनों पर मेडिसीन पार्क विकसित कर नीम, तुलसी, एलोवेरा और आंवला जैसे औषधीय पौधे लगाए जाएंगे। “एक पेड़ मां के नाम 2.0” अभियान के तहत पिछले वर्ष छत्तीसगढ़ में राष्ट्रीय राजमार्गों के किनारे ढाई लाख से अधिक पौधे लगाए गए।

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Chhattisgarh: प्रदेश में में खाद की कमी नहीं, खरीफ सीजन से पहले 9.29 लाख मीट्रिक टन उर्वरक स्टॉक, सरकार अलर्ट मोड पर

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Raipur: खरीफ सीजन 2026 से पहले छत्तीसगढ़ सरकार ने किसानों को समय पर खाद उपलब्ध कराने के लिए व्यापक तैयारी की है। मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में कृषि विभाग, सहकारिता विभाग, मार्कफेड और जिला प्रशासन प्रदेशभर में उर्वरकों के भंडारण और वितरण व्यवस्था पर लगातार निगरानी रखे हुए हैं।

राज्य सरकार ने स्पष्ट किया है कि प्रदेश में फिलहाल खाद की कोई कमी नहीं है। वर्तमान में गोदामों और सहकारी समितियों में 9.29 लाख मीट्रिक टन उर्वरकों का स्टॉक उपलब्ध है। वहीं केंद्र सरकार ने छत्तीसगढ़ को खरीफ सीजन 2026 के लिए 15.55 लाख मीट्रिक टन उर्वरक आवंटित किया है।

केंद्र से मिला 15.55 लाख मीट्रिक टन उर्वरक का लक्ष्य

राज्य को आवंटित उर्वरकों में शामिल हैं:

  • यूरिया : 7.25 लाख मीट्रिक टन
  • डीएपी : 3 लाख मीट्रिक टन
  • एनपीके : 2.50 लाख मीट्रिक टन
  • एसएसपी : 2 लाख मीट्रिक टन
  • एमओपी : 80 हजार मीट्रिक टन

कृषि विभाग के अनुसार 1 जून की स्थिति में रायपुर, महासमुंद, रायगढ़ और बालोद के रेक पॉइंट्स पर 6600 मीट्रिक टन अतिरिक्त यूरिया की खेप पहुंच रही है।

जिलों में पर्याप्त खाद उपलब्ध

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कृषि विभाग के मुताबिक गरियाबंद में 17,818 मीट्रिक टन, बस्तर में 29,719 मीट्रिक टन, रायपुर में 9,102 मीट्रिक टन यूरिया, राजनांदगांव में 42,997 मीट्रिक टन तथा बिलासपुर में 41,560 मीट्रिक टन उर्वरक उपलब्ध है। धमतरी जिले में 15,040 मीट्रिक टन और कोरिया जिले में भी पर्याप्त मात्रा में उर्वरक उपलब्ध कराया गया है। सहकारी समितियों के माध्यम से किसानों को लगातार खाद वितरण किया जा रहा है।

जमीन के रकबे के अनुसार मिलेगा यूरिया

किसानों को सुगम वितरण सुनिश्चित करने के लिए नई व्यवस्था लागू की गई है। 2.5 एकड़ तक भूमि वाले किसानों को एकमुश्त यूरिया, 2.5 से 5 एकड़ तक वाले किसानों को दो किश्तों में और 5 एकड़ से अधिक भूमि वाले किसानों को तीन किश्तों में खाद उपलब्ध कराया जाएगा।

नैनो डीएपी और नैनो यूरिया पर जोर

राज्य सरकार किसानों को संतुलित पोषक तत्व प्रबंधन के लिए नैनो डीएपी और नैनो यूरिया के उपयोग के प्रति भी जागरूक कर रही है। कृषि वैज्ञानिक और विभागीय अधिकारी किसानों को इनके लाभों की जानकारी दे रहे हैं। हालांकि कृषि विभाग ने स्पष्ट किया है कि नैनो उर्वरकों का उपयोग पूरी तरह स्वैच्छिक है और किसानों की सहमति के आधार पर ही उपलब्ध कराया जा रहा है।

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कालाबाजारी और गड़बड़ी पर सख्ती

कृषि मंत्री श्री रामविचार नेताम ने कहा कि किसानों के हितों से किसी भी प्रकार का समझौता बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। कोरिया जिले की जिल्दा सहकारी समिति में उर्वरक वितरण में अनियमितता मिलने पर संबंधित समिति प्रबंधक के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर विभागीय जांच शुरू कर दी गई है।

मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि खरीफ सीजन के दौरान किसानों को खाद, बीज और अन्य कृषि आदानों की उपलब्धता में किसी प्रकार की परेशानी नहीं होनी चाहिए। इसके लिए उर्वरकों के भंडारण, परिवहन और वितरण की नियमित समीक्षा की जा रही है।

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